Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!

काशीकथा विशेष..

विविधा..

बंगाली समाज और बनारस

 वाराणसी का नाम मन में आते ही हमारे सामने इस शहर के अनेक रूपों का खाका खिंच जाता है। वाराणसी अपने धार्मिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक,...

काशी में शिवशंकर के हैं इतने रूप

काशी प्रारंभ से ही शैव धर्म का प्रधान केन्द्र रही है। इसी कारण यहाँ शिवपूजा की प्रधानता मिलती है। शिव को मुख्यतः सृष्टि का...

रामनगर किला, काशी नरेश और संग्रहालय

गंगा के पूर्वी तट से सटकर खड़े रामनगर दुर्ग की आधारशिला वर्ष 1742 में राजा मंशाराम के कर कमलों से रखी गयी। तब यह...

काशी में सीरगोवर्धन क्यों है आस्था का केन्द्र : रविदास जयन्ती विशेष

 वाराणसी यानी संत महात्माओं की तपस्थली। इस पावन नगरी में तुलसीदास, कबीरदास से लेकर अनेकों महर्षि हुए; जिन्होंने समाज को नई दिशा दी। लोगों...

बनारस ने फ़िल्मी दुनिया को दिया है इतना कुछ…

लाइट, कैमरा, एक्शन! जी हाँ काशी में फिल्म निर्माण अब आम बात हो गई है। लागा चुनरी में दाग, गैंग्स आॅफ वासेपुर, मोहल्ला अस्सी, यमला...

ब्रिटिश हुकूमत इतना क्यों डर गयी थी आदि केशव मंदिर से..

मुस्लिम शासनकाल से लेकर अंग्रेजी हुकूमत तक का बनारस के जनजीवन पर बहुत प्रभाव पड़ा है। खासकर इस शहर की आस्था पर इन शासनकालों...

स्वतंत्रता संग्राम और बनारस

स्वतंत्रता के सात दशकों के बाद वर्तमान में जब हम अपने राष्ट्र के 200 वर्षों के पराधीनता के समय को देखते हैं तो हमें...

साक्षात्कार

पाण्डित्य की राजधानी है काशी- पं0 वागीश शास्त्री

प्रारम्भिक शिक्षा वृंदावन में ग्रहण करते हुए काशी की ओर ज्ञान साधना के संकल्प के साथ आए पं0 वागीश शास्त्री संस्कृत व्याकरण और भाषाशास्त्रा...

लोगों ने पसंद किया तो बस लिखता गया – मनु शर्मा

ऐतिहासिक व पौराणिक आख्यानों से नायकों के चरित्रा को लोक के निकट उपस्थित कर अद्भुत, आकर्षक व अनुकरणीय चित्रा बनाने वाले चितेरे को लोग...

पारंपरिक शान का शहर है बनारस – तरूण कांति बसु

बनारस एक आम शहर नहीं है। यह अपने आप में एक धरोहर है। गंगा किनारे बसे इस शहर की गलियां, घाट, मंदिर, मस्जिद, भवन...

बचाना होगा काशी के जलतीर्थों को – सुरेन्द्र नारायण गौड़

उम्र पाना एक पहलू है, उम्र जीना दूसरा पहलू। उम्र बढ़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है पर उम्र जीना हमारी समझ, अपनी दृष्टि, अपने बोध...

बदलाव में कहीं खो न जाये बनारस – नीलकण्ठ पुरुषोत्तम जोशी

काशी भले ही धनवान न रही हो लेकिन विद्वता और विद्वानों के मामले में तो यह नगर सदियों से समृद्ध रहा है। इस प्राचीन...

हस्तक्षेप

इस तरह धीरे-धीरे बनारस के घाटों का काल बन गया कछुआ सेंक्चुरी

बनारस के घाटों का सौंदर्य और मां गंगा का आकर्षण किसी को भी बरबस अपनी ओर खींच ही लेता है। लेकिन जब मां गंगा...

इस ‘क्योटो’ में धरोहरों पर कब्जे बहुत हैं

विडंबना देखिए कि जिस शहर बनारस की ताकत हस्तक्षेप से जानी जाती थी वहां अतिक्रमण सामर्थ्य का नया पैमाना बन चुका है। बेरोक-टोक ऐतिहासिक...

दुर्दशा के दुर्ग में काशीराज पुस्तकालय

-डॉ0 अवधेश दीक्षित देश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी जिस विरासत के लिये जानी जाती है उसमें यहां की विशिष्ट, संस्कृति, ज्ञान विज्ञान चिंतन, पाण्डित्य व...

राष्ट्र मन्दिर की उपेक्षा क्यों?

माँ भारती का अपने ढंग का यह अनोखा मन्दिर वर्तमान समय में घोर उपेक्षाओं से ग्रस्त है। यहाँ स्थापित भारतमाता की विस्तृत ‘भूतलीय भूगोलकीय...

संकट में हैं काशी के कुण्ड-तालाब

जल तीर्थों के जुझारू योद्धा ई0 सुरेंद्र नारायण गौड़ अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन बनारस को लेकर उनकी चिंता और चिंतन लगातार हमारे...

अभी अभी..