काशी के विश्वविद्यालय

काशी के विश्व विद्यालयकाशी के विश्व विद्यालय चिरकाल से सर्वविद्या का केन्द्र रही काशी में पांच ख्याति प्राप्त विश्वविद्यालय हैं जो काशी को महिमा मण्डित कर रहे हैं।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना का श्रेय 1916 ई0 में एनीबेसेन्ट के सहयोग से पण्डित मदन मोहन मालवीय जी को है। जिन्होंने इसकी स्थापना में अनेक राजाओं-महाराजाओं और आम जनों का सहयोग लिया। महाराजा प्रभुनारायण द्वारा दान में दी गई 1350 एकड़ भूमि पर लार्ड हार्डिंग के द्वारा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का शिलान्यास सम्पन्न हुआ, स्थापना अवसर पर गाँधी जी भी मौजूद थे। उन्होंने ही बनारस हिन्दू यूर्निवसिटी के स्थान पर ‘काशी हिन्दू विश्वविद्यालय’ नामकरण करवाया। एनी जी ने ब्भ्ै को सर्वप्रथम मालवीय जी को दिया। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विशाल व भव्य प्रांगण में सर्वप्रथम इंजीनियरिंग कालेज तत्पश्चात आर्टस कालेज और साइंस कालेज का निर्माण हुआ।

इस विश्वविद्यालय में तीन उच्चस्तरीय संस्थान, 11 संकायों एक महिला महाविद्यालय, इन शैक्षणिक विभाग तीन हाईस्कूल एक केन्द्रीय विद्यालय, चार संबंध डिग्री कालेजांे, त्ण्ळण्ैण्ब् बरकच्छा (मिर्जापुर), 40 छात्रावासों एक केन्द्रीय ग्रन्थालय और हजारों की संख्या में अध्यापकों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों को मिलाकर विशाल कुटुम्ब का निर्माण करता है। इसके विशाल प्रांगण के मध्य में बाबा विश्वनाथ जी का विशाल मन्दिर बिरला जी द्वारा निर्मित कराया गया है इसके अतिरिक्त इसमें भारत कला भवन, सर सुन्दर लाल चिकित्सालय इत्यादि प्रमुख ख्याति प्राप्त संस्थान उपस्थित हैं।

सर सुन्दर लाल जी ने इस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपतित्व का पद्भार ग्रहण किया तत्पश्चात महामना मालवीय जी, डाॅ0 एस0 राधाकृष्णन, डाॅ0 अमरनाथ, आचार्य नरेन्द्र देव जैसे कतिपय मूर्धन्य विद्वानों ने इस विश्वविद्यालय के कुलपति पद को सुशोभित किया वर्तमान समय काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति लालजी सिंह जी हैं।

महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ: महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ की स्थापना का श्रेय बाबू शिव प्रसाद गुप्त को है जिन्होंने इसकी स्थापना के लिए सर्वप्रथम 10 लाख रूपये का दान अपने अनुज हर प्रसाद गुप्त की स्मृति में प्रदान करके 10 फरवरी 1921 को काशी विद्यापीठ की स्थापना की। महात्मा गाँधी ने इस विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया और आगे चलकर इसका नाम महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ कर दिया गया। इस विद्यालय में गाँधी विचारधारा के अन्तर्गत बिना शुल्क बिना वेतन अध्ययन अध्यापन गाँधी विचार धारा के आधार पर किया जाता था।

प्रारम्भ में इसी विद्यालय में पहले शास्त्री तक पढ़ाई होती थी लेकिन अब इसमें विभिन्न प्रकार पाठ्यक्रमों और शोधापाधि के शिक्षण की उत्तम व्यवस्था है इससे संबंध अनेक महाविद्यालय तथा उदय प्रताप कालेज एक स्वायत्तशासी महाविद्यालय है काशी विद्यापीठ के पहले कुलपति डाॅ0 भगवानदास थें तत्पश्चात आचार्य नरेन्द्र देव डाॅ0 सम्पूर्णानन्द, आचार्य वीरबल इत्यादि विद्वानों ने इस पद को अलंकृत किया है। वर्तमान में इसके कुलपति डाॅ0 पृथ्वीस नाग हैं। इसी विश्वविद्यालय के स्नातक स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री जी थे।

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय: सम्पूर्णानन्द विश्वविद्यालय वाराणसी के जगतगंज इलाके में अवस्थित है। इसकी स्थापना 1791 ई0 ब्रिटिश हुकुमत द्वारा की गई। यह काशी का सबसे प्राचीन विश्व विद्यालय है। जिसका प्राचीन नाम ‘वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय’ था इस विश्वविद्यालय ने भारतीय संस्कृति में संस्कृत परम्परा को जीवित रखा। इस महाविद्यालय में संस्कृत, पालि, प्राकृत प्राचीन भारतीय भाषाओं अध्ययन का प्रमुख केन्द्र है। विश्वविद्यालय अधिनियम संवंत् 1915 में पारित हुआ और 22 मार्च 1955 से कार्य करने लगा इसके प्रथम कुलपति ‘आदित्यनाथ झा’ (प्ै।) बनाये गये तदोपरान्त सुरति नारायण मणि त्रिपाठी प्रो0 बद्रीनाथ शुक्ल, प्रो0 विद्यानिवास मिश्र जैसे मूधन्य विद्वानों ने इस पद का गरिमा बढ़ाई। ‘सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय’ नामकरण 1974 ई0 में पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ0 सम्पूर्णानन्द जी के नाम पर हुआ।

इस महाविद्यालय में छः प्रमुख संकाय तथा 1310 से अधिक महाविद्यालय संबद्ध है। सैकड़ो महाविद्यालय प्रदेश से बाहर के भी इसे संबद्ध है। संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का ‘सरस्वती भवन पुस्तकालय अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुस्तकालय है इसके पाण्डुलिपि विभाग में लाखों की संख्या में पाण्डुलिपियाँ सुरक्षित है तथा मुद्रित विभाग में लगभग पौने तीन लाख ग्रन्थ उपलब्ध है यहाँ  हजारों छात्रों ने विद्यावारिधि तथा विद्यावाचस्पति की उपाधि ग्रहण कर चुके हैं। वाग्देवी का मन्दिर काशी का प्रमुख आकर्षण है जो दक्षिणात्य शैली में निर्मित है।

केन्द्रीय तिब्बती उच्च अध्ययन संस्थान: 1968 ई0 में जवाहर लाल नेहरू के निर्देशन में काशी के सारनाथ के समीप केन्द्रीय तिब्बती उच्च अध्ययन संस्थान की स्थापना की गई। अपने प्रारम्भिक दिनों में यह सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से संबंद्ध 1977 में इसकी प्रगति को देखते हुए केन्द्रीय मानव संसाधन मन्त्रालय ने इसे स्वायत्त संस्थान घोषित कर दिया। 5 अप्रैल 1988 ई0 में इसे डीम्ड युनिवर्सिटी की मान्यता मिल गई इस महाविद्यालय में 5 संकायों के अन्तर्गत सुयोग्य विद्वानों द्वारा बौद्ध दर्शन में आधुनिक शास्त्र विमर्श, अनुसंधान में हजारो छात्रों को गुरूकुल जैसा आभास मिलता है। इस संस्थान का पुस्तकालय बहुत समृद्ध एवं प्राचीन है।

जामिया सल्फिया वाराणसी के रेवड़ी तालाब में स्थित जामिया सल्फिया विश्वविद्यालय है। इसमें इस्लामी दर्शन और इस्लाम धर्म के सिद्धान्तों व आदर्शो के अनुरूप आधुनिक ज्ञान विज्ञान की शिक्षा दी जाती है। इसके अतिरिक्त इस विश्वविद्यालय में मानविकी सामाजिक विज्ञान फार्मेसी कम्प्यूटर विज्ञान एवं आयुर्वेदिक चिकित्सा से संबंधित शिक्षा भी दी जाती है।     

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