यात्रा वाराणसी

काशी अपनी धार्मिकता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि काशी की धरती पर कदम रखते ही मन निश्चल और पवित्र हो जाता है। यहां लोग आस्था के साथ मंदिरों में अपने आराध्य के समक्ष माथा टेकते हैं। काशी में कई धार्मिक यात्राएं भी होती हैं। जिनका अपना अलग ही महत्त्व है। आस्थावान भक्त इन यात्राओं को पूरे भक्ति भाव से करते हैं।

1- पंचक्रोशी यात्रा- काशी की पंचक्रोशी यात्रा बहुत प्रसिद्ध है। यह सबसे लंबी यात्रा है। यह यात्रा गंगा स्नान करने के बाद विश्वेश्वर दर्शन से शुरू होती है। यात्रा पांच कोश (11 मील) के घेरे में होती है। यात्री नदी तट के सभी तीर्थों का दर्शन कर दुर्गाकुण्ड से कंदवा में देवायतनों का दर्शन कर रात्रि-विश्राम करते हैं। दूसरे दिन भीमचण्डी में दर्शन के बाद आराम, तीसरे दिन वरूणा नदी में स्नान वहां स्थित रामेश्वर के दर्शन के बाद विश्राम। चौथे दिन यात्री शिवपुर में रूकते हैं। पांचवे दिन कपिलधारा होते हुए फिर से साक्षी विनायक पहुंच कर यात्रा पूरी होती है। यात्रा के दौरान यात्री 108 तीर्थस्थलों और मंदिरों में जाकर दर्शन-पूजन करते हैं। जहां 56 शिवलिंग, 11 विनायक, 10 शिवगण, 10 देवियों, 4 विष्णुओं, 2 भैरवों और 15 अन्य तीर्थों में यात्री जाते हैं।

2- अन्तर्गृही यात्रा – इस यात्रा के तहत यात्री ओंकारेश्वर, विश्वेश्वर और केदारेश्वर के चारों ओर की परिक्रमा करते हैं। विश्वेश्वर खण्ड के अन्दर की यात्रा को भी अन्तर्गृही यात्रा कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस यात्रा को करने से काशी में किये गये सारे पाप कर्मों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही बिना भैरवी यातना के ही मोक्ष मिल जाता है। यात्रा के दौरान यात्री स्नान करके ब्रह्मनाल, मणिकर्णिका, पुष्करिणी, ज्ञानवापी, तारकेश, मत्स्योदरी और संगमेश्वर के दर्शन पूजन करते हैं।

3-पंचतीर्थ यात्रा – जैसा की नाम से ही ज्ञात हो जाता है कि यह यात्रा काशी के पांच तीर्थों में होने वाली यात्रा है। इसके तहत यात्री अस्सी संगम, दशाश्वमेध, वरूणा संगम, पंचगंगा और मणिकर्णिका तक यात्रा करते हैं। काशी में इस यात्रा का भी अपना महत्त्व है।

4-नित्य यात्रा – काशी की यह नित्य धार्मिक यात्रा है। श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद विश्वेश्वर, ज्ञानमाधव, ढुण्ढि राज, दण्डपाणि, कालभैरव, काशी देवी, गुहांगेश्वर गंगा और मणिकर्णिका का दर्शन-पूजन करते हैं। यह यात्रा श्रद्धालु प्रतिदिन करते हैं। इन प्रमुख यात्राओं के अलावा भी काशी में अन्य कई यात्राएं हैं।

5-एकायतन यात्रा- इस यात्रा के तहत श्रद्धालु मणिकर्णिका में स्नान के उपरांत विश्वेश्वर दर्शन करते हैं। एकायतन यात्रा सनत्कुमार संहिता में दी गयी है। इस यात्रा के अलावा जो यात्राएं हैं उनमें द्विरायतन, त्रिरायतन, चतुरायतन, पंचायतन, षडंग यात्रा, अष्टायतन यात्रा, एकादश आयतन यात्रा, चतुर्दश आयतन यात्रा, उत्तर मानस यात्रा का विधान है।

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