राष्ट्र मन्दिर की उपेक्षा क्यों?

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माँ भारती का अपने ढंग का यह अनोखा मन्दिर वर्तमान समय में घोर उपेक्षाओं से ग्रस्त है। यहाँ स्थापित भारतमाता की विस्तृत ‘भूतलीय भूगोलकीय मूर्ति’ देख-रेख और रख-रखाव मे बरती जा रही उपेक्षा के चलते अपनी चमक खो कर लगातार फीकी पड़ती जा रही है। इस विस्तृत भूतलीय मूर्ति के चारों ओर बने गलियारे एवं महाकक्ष के प्रवेशद्वार बने बरामदे के फर्श पर बिछे बलुआ पत्थर के किनारे घिसावट और क्षरण के चलते बदसूरत हो गये हैं, जिन्हें सीमेण्ट, बालू का मसाला लगाकार सपाट करने की कोशिश की गयी है, जो मन्दिर की बनावट में लगे मसाले से बिल्कुल ही अलग दिखाई पड़ती है। बेतरतिबी से हुई सीमेण्ट के मसाले की यह लीपा-पोती खूबसूरत कपड़ों पर लगे भद्दे पैबन्द जैसी लगती है। मन्दिर की दीवारों की चूना, कली को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे दो-तीन दशक से उस पर रंगाई-पुताई नहीं हुई है। मन्दिर के महाकक्ष के भीतरी दीवारों पर ग्रह-नक्षत्रों सहित बनी अन्य कलात्मक चित्र के साथ ही राष्ट्र के विभिन्न पक्षों को दिखाने के लिए बने भारत के मानचित्र दशकों की उपेक्षा और देख-भाल के अभाव में अपना रूप खो चुके हैं। मन्दिर में कई स्थानों पर लगे बलुआ पत्थर ‘स्टोन कैंसर’ के शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा कई जगहों के बलुआ पत्थर रसायनयुक्त तेल रंग लगाये जाने के कारण सांस न ले पाने से जगह-जगह से पर्त छोड़ रहे हैं।

मरम्मत और देख-रेख के अभाव और उपेक्षा के चलते मन्दिर के महाकक्ष की दीवारों में बनी कई खिड़कियों के चौखट सड़कर गलने लग गये हैं। इसके अलावा पर्याप्त कर्मचारियों के अभाव में इस मन्दिर की साफ-सफाई का काम ठीक से नहीं हो पाता। मन्दिर के सामने का उद्यान पाम्लविक्षिप्त लोगों की शरण स्थली बन गई है। मन्दिर के परिसर और अगल-बगल की जगह इस मन्दिर की गरिमा अनुकूल कत्तई नहीं लगती। वही इस मन्दिर के पिछवाड़े तो कूड़े का ढेर लगा रहता है। मन्दिर के सफाई की स्थिति अत्यन्त दयनीय है।

मन्दिर की उपेक्षा के इसी क्रम में सर्वाधिक अखरने वाली बात वाराणसी के पुलिस प्रशासन और पर्यटन विभाग की उदासीनता के चलते दिखाई देती है। मन्दिर परिसर के मुख्य द्वार पर पुलिस-विभाग की कृपा से सुबह सब्जी के ठेलों की लम्बी कतार लगी रहती है जिससे मन्दिर के परिसर में प्रवेश करना अत्यन्त दुरुह हो जाता है, इससे अधिकांश देशी-विदेशी पर्यटक मन्दिर प्रवेश से कतराने लगते हैं।

इस मन्दिर के परिसरीय हाते में मन्दिर की गरिमा के अनुकूल माहौल का सर्वथा अभाव रहता है। स्थानीय पुलिस-विभाग की कृपा के चलते इस परिसर में अवांछनीय लोगों को अक्सर जुआ खेलते, गांजा, सिगरेट और नशा करते देखा जा सकता है।

कुल मिलाकर माँ भारती का यह मन्दिर उपेक्षाओं, अव्यवस्थाओं का बुरी तरह का शिकार हो गया है। यह स्थिति किसी भी राष्ट्रप्रेमी व्यक्ति के लिए दुःख का विषय है।

यहाँ सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि जब देशभर में तमाम राजनीतिज्ञों और नेताओं की मूर्तियों, समाधियों और स्मारकों के निर्माण में अरबों-खरबों का खर्च हो रहा है लेकिन राष्ट्र देवता का यह मन्दिर आज अपनी हालत पर आंसू बहा रहा है। इस मन्दिर की ओर केन्द्र और प्रदेश सरकार का ध्यान न दिया जाना किसी भी राष्ट्रप्रेमी के लिए अखरने वाली बात है। आज आवश्यकता इस बात की है कि राष्ट्रीय अस्मिता के इस मन्दिर को सर्वोच्च राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा प्रदान कर उचित रख-रखाव की व्यवस्था की जाये।

जगनारायण

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