संग्रहालय वाराणसी

भारत कला भवन- बीएचयू स्थित भारत कला भवन पुरातत्व कलाकृतियों का एक बेहतरीन संग्रहालय है। इस संग्रहालय भवन में एक लाख से ज्यादा प्रागैतिहासिक वस्तुएं, पकी मिट्टी की बनी वस्तुएं, सिक्के, मुद्रा, मणि, मिट्टी के बर्तन, वस्त्र आभूषण पन्ना सहित अन्य कीमती रत्न, पीतल के बर्तन, हथियार, प्राचीन दस्तावेज, साहित्यिक पुस्तकों का संग्रह, लघु चित्र, सजावट के दुर्लभ नमूने, राजस्थानी, नेपाली, पहाड़ी, तिब्बती, कंपनी शैली के लघुचित्र सुरक्षित संग्रहित किये गये हैं। इस संग्रहालय की स्थापना कलाविद् स्व0 रायकृष्णदास ने 1920 में गोदौलिया के पास भारतीय ललित कला परिषद के रूप में की थी। 1926 में यह सेंट्रल हिन्दू स्कूल में स्थापित हो गया। इसके बाद 1929 में काशी नागरी प्रचारिणी सभा में स्थानान्तरित किया गया। 1950 में इसका शिलान्यास बीएचयू में पंडित जवाहर लाल नेहरु ने किया।

रामनगर किला- काशी में दर्शनीय स्थल के रूप में रामनगर किला अपनी ऐतिहासिकता के लिए प्रसिद्ध है। गंगा उस पार किला गंगा के किनारे ही है। इस किले का निर्माण महाराजा बलवंत सिंह ने कराया था। इसी स्थान पर भव्य महल का भी निर्माण कराया गया जिसमें आज भी काशी नरेश के वंशज रहते हैं। किले में एक संग्रहालय भी है। जहां हाथी दांत से बनी कलात्मक वस्तुएं सुरक्षित हैं। साथ ही पुराने हथियार के अलावा अन्य दुर्लभ चीजें हैं। किले में कई मंदिर भी हैं। संग्रहालय में एक खगोल घड़ी भी है। किला अपनी इन्हीं विरासतों के कारण पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है।

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