ध्रुपद मेले में संगीत का मनभावन श्रृंगार

तुलसीघाट पर 24 से 27 फरवरी तक चला अखिल भारतीय 39 वां धु्रपद मेला
कल-कल करती मां गंगा की अविरल धारा और उसके समानान्तर चार निशाओं तक बही शास्त्रीय संगीत की रसधार में श्रोता गोते लगाते रहे। सुर, ताल और बंदिशों से सजे शास्त्रीय संगीत का अर्पण धु्रपद मेले को अविस्मरणीय बना गया। धु्रपद मेले के गुलदस्ते में शास्त्रीय संगीत के हर रस का रंग देखने को मिला। इस दौरान फनकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भीतर से झंकृत कर दिया। महाराजा बनारस विद्या मंदिर न्यास की ओर से आयोजित अखिल भारतीय 39 वां ध्रुपद मेला 24 से 27 फरवरी तक परम्परानुसार तुलसीघाट पर सायंकाल सात बजे से आयोजित किया गया। चार दिनों तक चले इस संगीत के संगम में श्रोता ताल लय और बंदिशों मे डूबते-उतराते रहे। इस दौरान किसी फनकार ने राग मल्हार तो किसी ने रागश्री से अपना जादू बिखेरा। धु्रपद मेले का उद्घाटन 24 फरवरी को पूर्व काशी नरेश के पुत्र अनंत नारायण सिंह एवं प्रो0 विश्वमभरनाथ मिश्र ने दीप जलाकर किया। इसके बाद शुरू हुआ संगीत समर। शुरूआत अवधी घराने के डाॅ0 राजखुशी राम ने मृदंग बजाकर किया। उन्होंने कई पारंपरिक रागों में ऐसा मृदंग बजाया कि श्रोता खुद को वाह-वाह करने से नहीं रोक पाये। इसके बाद अशोक धर नंदी ने राग पुरिया में तान छेड़ी। जैसे-जैसे निशा ढल रही थी संगीत की सुमधुर लहरियां जवां हो रही थी। इस बीच आरती बनर्जी ने रूद्रवीणा पर राग सरस्वती सुनाकर भाव विभोर कर दिया। वहीं अन्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से संगीत के विभिन्न आयामों का जलवा बिखेरा। ध्रुपद मेले की दूसरी निशा प्रख्यात धु्रपद गायक प्रो0 ऋत्विक सान्याल के गायन से सराबोर रही। प्रो0 सान्याल ने रागश्री में ‘‘ भस्म भूषण अंग लहे शिव ’’ बंदिश सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ पखावज पर तापस दास, तानपुरा पर आशुतोष भट्टाचार्या, रंजीता मुखर्जी, जापान के माव सुजुकी ने संगत किया। इसके बाद उस्ताद वासिफुद्दीन डागर ने अपनी प्रस्तुति ने धु्रपद में रस घोला। इस दौरान पंडित देवव्रत मिश्र ने राग पुरिया सुनाकर झूमने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर उस्ताद वासिफुद्दीन डागर, दाल चंद्र शर्मा, रामकुमार मलिक को सम्मानित भी किया गया। धु्रपद मेले की तीसरी निशा युवाओं के नाम रही। राजा मान सिंह तोमर विश्वविद्यालय ग्वालियर के छात्रों ने बेजोड़ प्रस्तुति देकर खूब वाह-वही लूटी। छात्रों ने राग भोपाली में मध्य व द्रुत तय में अलाप सुनाया। वहीं, चैताल में बंदिश ‘‘ तू ही चन्द्र तू ही पवन’’ और ‘‘ तेरो मन में कितने गुन रे’’ सुनाकर ऐसा जादू चलाया कि सभी तारीफ करते रहे। इसके बाद मुंबई की सलमा घोष ने राग कंबोजी में ‘‘ हे शिव महादेव व ‘‘ शिव-शिव शंकर आदि देव सुनाया। कार्तिक कुमार ने हेमंत राग ने मन मोहा तो मधु चन्द्रा ने राग बागेश्वरी प्रस्तुत किया। धु्रपद मेले की अंतिम निशा हल्की-हल्की फुहारों के बीच शुरू हुई। जिसकी शुरूआत भक्तराज भोंसले ने पखावज से चैताल में शिव परन सुनाकर किया। उनके साथ सारंगी पर संगत धु्रव कुमार ने किया। इस बीच बी0एच0यू0 आई0आई0टी0 व कनेडियन सेंटर के छात्रों ने नाट्य वीर गंगा के मंचन से स्व0 वीरभद्र मिश्र को श्रद्धांजलि दी। पंडित कैलाश पवार ने राग विहाग में बंदिशें और डाॅ0 मधु भट्ट ने भी अपनी प्रस्तुति ने महौल को इन्द्रधनुषी छटां दी। इस दौरान पेंटिंग प्रदर्शनी भी लगायी गयी थी जिसका उद्घाटन प्रो0 विश्वम्भरनाथ मिश्र ने किया। पूरे धु्रपद मेले का संचालन जाने-माने कला समीक्षक डाॅ0 राजेश्वर आचार्य ने किया।

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