श्री विद्या मठ वाराणसी

वाराणसी में स्थापित मठ और आश्रम आज भी उस प्राचीन भारतीय गुरू शिष्य परम्परा को जीवित रखे हुए हैं। पहले जहां शिक्षा लेने के लिए बालक अपना घर छोड़कर आश्रम और मठों में जाते और वहीं रहकर गुरू की सेवा के साथ ब्रहृमचर्य का पालन करते हुए वेदों और शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करते उसी प्रकार आज भी काशी के ऐसे कई आश्रम और मठ हैं जहां वर्तमान में उसी परम्परा का निर्वहन किया जा रहा है। इन मठों एवं आश्रमों में न केवल बालकों को वेद, शास्त्र एवं पुराणों का अध्ययन कराया जाता है बल्कि बाकायदा प्रत्येक सप्ताह मूर्धन्य विद्वानों के मध्य शास्त्रार्थ भी कराया जाता है। काशी में इस परम्परा को संजीवनी देने में श्री विद्या मठ का योगदान सराहनीय है। इस मठ की स्थापना के बाद से ही इसमें बालकों को वेद, शास्त्र एवं पुराणों की निशुल्क शिक्षा देने के साथ ही उनके रहने खाने की व्यवस्था की गयी है। इस मठ में बच्चों की वह नर्सरी तैयार की जाती है जिनके कंधों पर आगे चलकर भारतीय अध्ययन पद्धति बचाने का बीड़ा होगा। काशी के वर्तमान मठों में श्री विद्या मठ काफी चर्चित रहा है। इस मठ के प्रमुख पीठाधीश्वर हैं जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी। मठ के सभी कार्यक्रम उनके शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के निर्देशन में संपादित होता है। इस मठ में प्रायः ज्योतिष, शास्त्र, वेद पुराण पर तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। वर्तमान में इस मठ में करीब 200 विद्यार्थी वेद एवं शास्त्रों की पढ़ाई स्थायी रूप से रहकर कर रहे हैं। इनके रहने खाने की व्यवस्था मठ की ओर से निशुल्क की जाती है। इन विद्यार्थियों के भीतर वेदों, शास्त्रों के प्रति जिज्ञासा भरने के उद्देश्य से प्रत्येक माह की त्रयोदशी को शास्त्रार्थ सभा का आयोजन किया जाता है। इस सभा में बड़े-बड़े विद्वान भाग लेते हैं और वेदों शास्त्रों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी-अपनी राय रखते हैं। वहीं हर माह शुक्ल पक्ष की एकादशी से 5 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस दौरान भी काफी संख्या में विद्वान मठ में पहुंचते हैं। वहीं धर्म शास्त्र वेद से जुड़े किसी भी मुद्दे को लेकर होने वाली बहस या ऐसे किसी विषय में होने वाले तर्क-वितर्क के समाधान के लिए मठ में अक्सर विद्वानों की सभा आयोजित की जाती है। मठ परिसर में ही हनुमान जी एंव राजराजेश्वरी माता का मंदिर है। शुक्रवार को काफी संख्या में महिलाएं मंदिर में आकर मां का दर्शन-पूजन करती हैं। श्री विद्यामठ केदारघाट मोहल्ले में स्थित है। मठ के विशाल मुख्य द्वार से प्रवेश करने पर काफी चौड़ी एवं लम्बी गैलरी है, जिसके दोनों ओर कमरे बने हुए हैं। गैलरी में एक कोने से मठ के उपरी तल पर जाने के लिए सीढ़ी बनी हुई है। मठ से प्रायः विद्यार्थियों के वेद पाठ करने की आवाज सुनाई देती है। इस मठ की खासियत यह है कि यहां रहने वाले सभी लोग ब्रह्मचारी हैं। वहीं इस मठ में अनुशासन का बहुत ध्यान रखा जाता है। मठ में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों की वेश-भूषा पारम्परिक धोती कुर्ते में होती है। साथ ही सभी विद्यार्थी जनेउ भी धारण किये रहते हैं। मठ में अनुशासन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विद्यार्थी प्रातःकाल उठकर सूर्य नमस्कार अवश्य करते हैं। वहीं, सायंकाल में भी वंदना करना नहीं भूलते। कैन्ट स्टेशन से करीब 5 किलोमीटर दूर इस मठ तक सोनारपुरा होते हुए पहुंचा जा सकता है।

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