राम जानकी मठ, अस्सी वाराणसी

काशी में मठों की श्रृंखला में अस्सी स्थित राम जानकी मठ भी काफी प्राचीन रहा है। इस मठ की खासियत यह है कि यहां भगवत नाम यानी सत्संग हर समय चलता रहता है। बहुत बड़े परिसर में स्थापित इस मठ में साधु महात्माओं का आना जाना प्रायः लगा रहता है। सन् 1984 में यह मठ पंजाबी भगवान जी महराज को प्राप्त हुआ जो कि चित्रकूट धाम में रहते थे। बाबा लाल दयाल संत थे जिनकी मूलगादी पंजाब के ध्यानपुर है। राम जानकी मठ उन्हीं की गद्दी है। इसके पहले महंत रामकृष्ण दास आयुर्वेदज्ञ थे। सन् 1984 के पहले इस मठ की हालत बहुत खराब थी। जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पंजाबी महराज ने इस मठ का जीर्णोद्धार कराया। सन् 2002 में इस मठ में राम दरबार एवं हनुमान जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गयी। इसी दौरान मठ में राम चरित मानस का पाठ एवं अखण्ड राम-नाम संकीर्तन शुरू हुआ जो अनवरत चलता रहता है। मठ की ओर से साधु महात्माओं को रहने एवं उनके भोजन की भी व्यवस्था की जाती है। चार मंजिला इस मठ में पहले तल पर बड़ा सा हाल है जिसमें बैठकर साधु-संत ढोल मजीरे के साथ हर समय भजन कीर्तन करते रहते हैं। इसी हाल में राम दरबार का मंदिर भी स्थापित है। मठ परिसर में एक प्राचीन कुआं भी है कहा जाता है कि पहले लोग इस कुएं के जल से स्नान करते थे। मान्यता थी की इस कुएं के जल से स्नान करने से सभी प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं। हालांकि वर्तमान में इस कुंए के जल लोग स्नान नहीं करते हैं। मठ की ओर से विद्यार्थियों के रहने एवं भोजन की भी निशुल्क सुविधा प्रदान की जाती है। साथ मठ में गोशाला भी है जिसमें वर्तमान में 20 गायों की सेवा की जा रही है। वैसे तो मठ में साल भर प्रवचन, शास्त्र, वेद एवं पुराणों का पाठ तो होता ही है वहीं, अन्य बड़े आयोजन किये जाते हैं। साथ ही समय-समय पर मठ की ओर से पौराणिक कथाओं पर आधारित लीलाएं भी होती रहती हैं। जबकि बड़े त्यौहारों, पर भी मंदिर में भण्डारे एवं भजन कीर्तन का आयोजन किया जाता है। वर्तमान में मठ के महंत रामलोचन दास जी हैं।

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