प्रो0 रघुनाथ गिरि वाराणसी

 सन् 1931, बिहार सिवान के दीनदयालपुर में जन्म हुआ। बी0एच0यू0 से उन्होंने न्याय-वैशेषिक में दर्शनाचार्य तथा दर्शनशास्त्र में एम0ए0 तथा पी0एच0डी0 की उपाधि प्राप्त की। आपने अध्यापकीय जीवन की शुरूआत दर्शन विभाग महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से किया वहीं प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष इत्यादि पदों पर रहते हुए सेवानिवृत्त हुए। गिरि को न्याय् वैशेषिक, सांख्य-योग एवं पुराणों के अधिकृत विद्वान के रूप में भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों में आमंत्रित किया जाता रहा है। दर्शन के व्याख्यान के लिए 1992 में अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों में गये। गवेषणात्मक शोध-निबन्धों के अतिरिक्त बौद्ध तर्क भाषा’ (हिन्दी व्याख्या) एवं दी फीलॉसफी ऑफ दि पुराणाज’ इनकी बहुमान्य कृतियाँ है। आज भी प्रो0 गिरि अपने वार्द्धक्य की परवाह किये बिना दार्शनिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

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