प्रो0 अशोक कुमार चटर्जी

प्रो0 ए0के0 चटर्जी टी0आर0वी0 मूर्ति के निर्देशन में शोध कार्य किये। तर्कशास्त्र तथा विश्लेषणात्मक दर्शन के प्रोफेसर के रूप में 1950 से 1963 आगरा में अध्यापन कार्य किये। 1963 से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के एडवांस स्टडी सेंटर को ज्वाइन किया और 1985 में दर्शन एवं धर्म विभाग के विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्ति ली आप बौद्ध दर्शन के असाधारण विद्वान (विशेषकर योगाचार) हैं और दार्शनिक धारा को प्रभावित करते रहे हैं।

    प्रो0 डेविड जे0 कलूपहन ने प्रो0 ए0के0 चटर्जी के बारे में ठीक ही कहा है कि “अशोक कुमार चटर्जी ने योगाचार पर हुए कुछ महत्त्वपूर्ण कार्यों में से एक महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। दुर्भाग्य से इनके ग्रंथ योगाचार विज्ञानवाद को वह प्रसिद्धि नहीं मिली जो उनके गुरू प्रो0 टी0आर0वी0 मूर्ति के ग्रंथ दी सेन्ट्रल आइडिया ऑफ माध्यमिक फिलासफी को मिली। आपके महत्वपूर्ण ग्रंथ निम्नवत हैं-

1-   दि योगाचार आइडलिज्म (1962)

2-   रीडिंग्स आन योगाचार आइडलिज्म (1971)

3-   फैक्ट्स आ बुद्धिस्ट थॉट (1973)

4-   साक्षी इन वेदान्त (1978)

    इसके अलावा अन्य लघु ग्रंथों का भी प्रणयन किया है। प्रो0 ए0के0 चटर्जी एक बेहतरीन एवं उर्जावान शिक्षक हैं। आज भी आप दर्शन के गम्भीर चिन्तन में सक्रिय हैं तथा बनारस के दार्शनिक समाज के प्रेरणास्रोत हैं। अपनी सहज एवं सूक्ष्म दार्शनिक विचारों से लगातार विद्वानों में आदर प्राप्त करते रहे हैं।

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