काशी की मस्जिदें

विभिन्न संस्कृतियों, सभ्यताओं और धर्मों की नगरी के रूप में काशी विख्यात रही है। मंदिरों के इस शहर में मस्जिदों, गुरूद्वारों और चर्चों की मौजूदगी सर्व धर्म की नगरी के रूप में इसे श्रेष्ठ बनाती है। यही कारण है कि यहां की शुद्ध एवं पवित्र हवा में मंत्रों की ध्वनि के साथ अजान और गुरूवाणी साथ-साथ तैरती रहती हैं। काशी में बहुत सी मस्जिदें भी हैं जिनकी स्थापत्य शैली बेहतरीन रही है।

आलमगीर की मस्जिद- आलमगीर की मस्जिद अपनी भव्यता एवं विशालता के लिए प्रसिद्ध रही है। मस्जिद की दो मीनारे तो 3 सौ फुट ऊँची थी जिसे काफी दूर से भी देखा जा सकता था। बाद में ये दोनों मीनारें क्षतिग्रस्त होकर गंगा में समा गयीं। यह बेहतरीन मस्जिद पंच गंगा घाट पर स्थित है। इस मस्जिद का निर्माण 1626 ई0 में किया गया। हर शुक्रवार को मस्जिद में नमाज अदा करने वालों की भीड़ तो होती ही है ईद, बकरीद के मौके पर तो नमाजियों की संख्या बहुत अधिक होती है।

बांसफाटक की मस्जिद बांसफाटक क्षेत्र में कारमाइकेल पुस्तकालय के ठीक सामने यह मस्जिद स्थित है। इस मस्जिद का निर्माण काफी पहले सन् 1137 ई0 में शहाबुद्धीन ने कराया था। मस्जिद की बाहरी दीवारें पर पठानी शैली का प्रभाव है जिससे इसकी सुन्दरता और बढ़ जाती हैं इस मस्जिद की खासियत यह है कि यह जमीन से काफी ऊँचाई पर है। मस्जिद में प्रतिदिन काफी संख्या में नमाज अदा करने वाले पहुंचते है।

चौखम्भा की मस्जिद यह मस्जिद अपनी आकर्षक स्थापत्य शैली के लिए जानी जाती है। इस मस्जिद का प्रवेश द्वार 13 फीट ऊँचा एवं 4 फीट चौड़ा है जो पत्थर से निर्मित किया गया है। वहीं, इसके खम्भों पर घंटे खुदे हैं। यह मस्जिद पक्के महाल में रंगीन दास फाटक के बगल में एक सकरी गली में स्थित है।

बकरिया कुण्ड की मस्जिद बकरिया कुण्ड क्षेत्र में मौलवी फकरूद्धीन की दरगाह के पूर्व यह मस्जिद स्थित है। इस मस्जिद की लंबाई 37 फुट एवं चौड़ाई 90 फुट है। इस मस्जिद के निर्माण काल का प्रमाण इसकी छत पर फारसी में लिखे एक लेख सक मिलता है। यह लेख फिरोजशाह के समय का है। लेख के अनुसार सन् 777 हिज्री तथा सन् 1326 ई0 में जिया अहमद ने इस मस्जिद का निर्माण करवाया था। मुस्लिम त्यौहारों के दौरान काफी संख्या में नमाज अदा करने वाले मस्जिद में पहुंचते हैं।

लाट भैरव की मस्जिद इस मस्जिद का निर्माण मुगल बादशाह औरंगजेब ने करवाया था। इस मस्जिद के पास एक चबूतरे एवं कब्रिस्तान में काफी संख्या में नक्काशीदार पत्थर लगे हुए है। उन पत्थरों पर तांबे की परत चढ़ाई गई है।

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