महामहोपाध्याय पं0 गोपीनाथ कविराज

तन्त्रशास्त्र के तलस्पर्शी ज्ञाता, भारतीय विद्या का चलता फिरता विश्वकोश कहे जाते थे। आप विद्वान के साथ-साथ पहुँचे हुए साधक, तन्त्रशास्त्र के सैद्धान्तिक तथा व्यावहारिक दोनों पक्षों के ज्ञाता थे। अतः विद्वता, साधना और स्थितप्रज्ञता का मणिकांचन संयोग इनके व्यक्तित्व की प्रधान विशिष्टता है।

1-   भारतीय संस्कृति एवं साधना भाग-1 व 2

2-   तान्त्रिक वांग्मय में शात्र्य-दृष्टि

3-   काशी की सारस्वत साधना

4-   तान्त्रिक संस्कृति के अलावा अंग्रेजी, बांग्ला की कई महत्वपूर्ण ग्रंथ इनके प्रमुख     निबन्धों का संग्रह निम्नवत प्रकाशित हो चुका है।

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