गौड़िया मठ वाराणसी

मानव कल्याण एवं समाजसेवा के आदर्श पर स्थापित सोनारपुरा स्थित गौड़िया मठ काशी के मठों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सोनारपुरा से भेलूपुर की तरफ आगे बढ़ने पर कुछ ही मीटर पर बायीं ओर यह मठ स्थापित है। इस मठ में हर समय साधू संतो एवं धार्मिक यात्रा पर आये यात्रियों का जमावड़ा लगा रहता है।

मठ का इतिहास – गौड़िया मठ का इतिहास चैतन्य महाप्रभु से जुड़ा हुआ है। इनका जन्म 1575 ई0 में पश्चिम बंगाल के नवदीप (नदिया) में हुआ था। इनकी माता का नाम शचि मिश्र एवं पिता का नाम जगन्नाथ मिश्र था। कहा गया है होनहार बिरवान  के होते चीकने पात “चैतन्य महाप्रभु बाल्यकाल से ही अपने हम उम्र बच्चों से अलग थे। इसी अवस्था में इन्होंने कई लीलाएँ की। कट्टर मुस्लिम शासक जब पूरे भारत पर अत्याचार कर रहे थे इससे नदिया भी अछूता नहीं रहा। यहाँ भी खूब अत्याचार हुआ। इस दौरान चैतन्य महाप्रभु ने लोगों के बीच आशा का संचार जमकर किया एवं जनमानस के कल्याण के लिए काफी योगदान दिया। करीब 1880 के दशक में उड़ीसा के पुरी में भक्ति सिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी का जन्म हुआ। आगे चलकर गोस्वामी चैतन्य महाप्रभु के विचारों से अत्यधिक प्रेरित हुए। इन्होंने चैतन्य महाप्रभु के विचारों का देश-विदेश में जमकर प्रचार-प्रसार किया। इन्होंने आजादी के पहले सोनारपुरा में किराये के मकान में चैतन्य महाप्रभु, राधा एवं कृष्ण की मूर्ति स्थापित की। इस दौरान लोगों के सहयोग से गौड़िया मठ की स्थापना हुई। आम लोगों एवं डीएम, गवर्नर के सहयोग से 1982 में जिस किराये के मकान में मठ की स्थापना हुई थी उसी में स्थायी रूप से मंदिर बनाया गया।

वर्तमान स्थिति- अपने स्थापना से लेकर वर्तमान तक मठ ने मानव कल्याण के लिए निरंतर कार्य किया है। गरीब एवं असहायों के लिए मठ में निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती है। जिसके तहत सुबह के समय एल्योपैथ एवं शाम को होम्योपैथ के चिकित्सक मरीजों का इलाज करते हैं। मठ की ओर से वृद्धा आश्रम की संचालित होता है। मठ की स्थापना से अब तक लगभग 20 से ज्यादा मठाधीश हो चुके हैं। वर्तमान में मठ के मठाधीश भक्ति चारू गोविन्द महराज हैं। वहीं मठ में 10 से 12 लोग संचालन का कार्य नियमित रहकर करते हैं। उनमें प्रमुख रूप से मालिनी दासी सनद कुमार दास हैं। गौड़िया मठ में चैतन्य महाप्रभु की जयन्ती यानी होली की पूर्णिमा को बड़ा कार्यक्रम होता है। इस दौरान सत्संग एवं प्रवचन भी होते हैं। वहीं, वैशाख माह की अक्षय तृतीया से अगले 21 दिनों तक श्रृंगार कार्यक्रम चलता है। इसके तहत चैतन्य महाप्रभु, राधा कृष्ण का 21 दिन अलग-अलग तरह से श्रृंगार होता है। इस पूरे कार्यक्रम के अन्तिम दिन मठ की तरफ से भण्डारे का आयोजन होता है। जिसमें काफी संख्या में लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। मठ सुबह 5 बजे मंगला आरती होने के साथ खुलता है एवं दोपहर 12 बजे तक खुला रहता है। वहीं शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। मठ परिसर से ही सटा हुआ इसी का भाग गेस्ट हाउस भी है जहाँ दूर-दूर से आने वाले यात्री रूकते हैं। गौड़िया मठ का हेड ऑफिस कलकत्ता के बागबाजार में स्थित है। साथ ही मठ के देश-विदेश में मिलाकर 25 से अधिक शाखायें हैं। मानव समाज के उत्थान में लगे गौड़िया मठ के मुख्य द्वार पर आमने-सामने मुखों वाले सिंह स्थापित किये गये हैं। जो देखने में काफी आकर्षक लगते हैं। मुख्य द्वार से अन्दर घुसने पर दाहिनी ओर जाने पर मंदिर एवं बायीं ओर गेस्ट हाउस स्थित है।

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