मालवीय जी के प्रति समकालीनों के विचार

 

“मैं मालवीय जी से बड़ा देशभक्त किसी को नहीं मानता। मैं सदैव उनकी पूजा करता हूँ। जीवित भारतीयों में मुझे उनसे ज्यादा भारत की सेवा करने वाला भी कोई दिखाई नहीं देता।”

-महात्मा गाँधी

“अपने जागते क्षणों में मालवीय जी सदा भारत के लिए जागते रहे और अपनी निद्रा के क्षणों में वे जो भी स्वप्न देखे, वह भारत के लिए ही थे। भारत में योग्य एवं विलक्षण बुद्धि के अनेक लोग मिल सकते हैं, परन्तु महामना के समान विश्वास-पात्र, सर्वस्व त्यागी एवं राष्ट्र के लिए समर्पित व्यक्तित्व दूसरा नहीं मिल सकता।”

-मुशी ईश्वरशरण

“मालवीय जी जैसे महापुरुष कहीं सैकड़ों वर्षों में पैदा हुआ करते हैं। देश के अथवा काँग्रेस के सामने जब कोई विशेष संकट उपस्थित हुआ, महामना मालवीय जी उसे उबारने के लिए चट्टान की तरह खड़े पाये गये। ऐसे नवरत्न की अर्चना-वन्दना कौन देश नहीं करेगा?”

-लाला लाजपत राय

“पण्डित मालवीय जी बड़ी उपलब्धियों के लिए जीवित रहे। यह देश उस महान् व्यक्ति का उतना ऋणी है, जिसे कभी चुकाया नहीं जा सकता।”

-सर वी0टी0 कृष्णम्आचार्य

“मालवीय जी ने 60 वर्ष तक जिस श्रद्धा, लगन निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र की सेवा की है, वह किसी भी देश के इतिहास में एक अद्भुत और स्मरणीय घटनावृत्त है।”

-पं0 हृदय नाथ कुंजरू

“मालवीय जी ही एक ऐसे व्यक्ति थे, जिनमें इतना साहस था कि जिस बात को वह ठीक समझते थे, उसके लिए चाहे कोई भी उनका साथ न देता हो, फिर भी वे अकेले मैदान में डटे रहते थे। अपनी आन्तरिक प्रेरणा के प्रति इस तरह की असाधारण निष्ठा का उदाहरण विरले महापुरुष ही दे सकते हैं। कठिनाईयों के क्षण में काँग्रेस कार्यकर्त्ता उनकी ओर उम्मीद से देखते और कभी निराश नहीं होते थे।”

-डॉ0 पट्टाभि सीतारामैया

“काँगेस को शुरू करने, बनाने और बढ़ाने में मालवीय जी का एक बहुत बड़ा हिस्सा रहा है। भारतीय राजनीति में मालवीय जी अगुआ भी रहे और एक कड़ी भी रहे जोड़ने की, उन लोगों, को, जो कांग्रेस में आगे-पीछे गिने जाते थे; यानी गरम और नरम दल वालों को। उस समय के बड़े नेताओं में प्राचीन संस्कृति की ओर सबसे अधिक ध्यान मालवीय जी का रहा। उन्होंने विज्ञान और टेक्नोलॉजी को अपनी पुरानी संस्कृति के साथ जोड़ने का एक बहुत बड़ा कार्य किया।”

-पं0 जवाहर लाल नेहरू

“मालवीय जी भारतीय संस्कृति के मूर्तिमान स्वरूप थे। उन्हेंने देश की उन्नति के लिए विज्ञान के प्रोत्साहन के साथ देशवासियों को प्रगतिशीलता की ओर प्रेरित किया। हिन्दू आदर्शों का नवीनीकरण तथा देश की भौतिक उन्नति में उनका प्रयोग मालवीयजी के जीवन का एक बहुत बड़ा कार्य है।”

-डॉ0 सर एस0 राधाकृष्णन्

“मालवीय जी राष्ट्रीय नेता के रूप में बेजोड़ थे। मेरी पीढ़ी के लोगों का सौभाग्य रहा है कि हमें उनके नेतृत्व में काम करने का अवसर मिला। आधुनिक भारत-निर्माताओं में मालवीय जी का मुख्य स्थान है। उनकी साधना, उनका त्याग और उज्ज्वल चरित्र हमारे लिए सदा मार्ग-करते रहेंगे।

-श्री लाल बहादुर शास्त्री

“आज जिस अग्नि के समक्ष खड़े होकर तुम इतनी प्रसन्नता से नाच रहे हो, उसे प्रज्ज्वलित करने में पं0 मालवीय जी की हड्डियों ने चन्दन की लकड़ी का काम किया है, इसे कभी मत भूलना।”

-नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

“अपने दल के नेता पं0 मदन मोहन मालवीय एक बहुत उच्च कोटि के आदमी हैं, ये सरकार को कड़ी से कड़ी बात कहते हैं, अंग्रेज राजनीतिज्ञों को डाँटते हैं। इनसे बढ़कर दूसरा कोई स्वार्थ-रहित नेता नहीं है।”

-अर्नाल्डवार्ड, ब्रिटिश सांसद

“मालवीय जी केवल राजनीतिज्ञ नहीं, भारत की राष्ट्र-भाषा सम्बन्धी आन्दोलन के जनक भी थे। अपने समय के भारत में वे महानतम शिक्षाविद् थे। उन्होंने सांस्कृतिक नवजागरण को शक्तिशाली बनाया, फलस्वरूप भारतीय भाषाओं में नव-युग का उदय हुआ। धार्मिक हिन्दू विचारों व कर्मों के सम्बन्ध में वे श्रेष्ठतम प्राधिकारी थे। गाँधी जी उन्हें प्रातः स्मरणीय मानते थे।”

-डॉ0 के0एम0 मुंशी (पूर्व राज्यपाल, उ0प्र0)

“वे अपने समय के महानतम हिन्दू थे। उनकी महानता निर्विवाद थी और उनकी भद्रता अवर्णनीय। वे हृदय से एक हिन्दू, एक राष्ट्रवादी और महान् मानवतावादी थे।”

-स्वामी श्रद्धानन्द

“मालवीय जी के समान सच्चा राष्ट्रवादी कौन था? यह हम सब का अभाग्य है कि जो मालवीय जी को साम्प्रदायिक कहा गया और साम्प्रदायिकों को राष्ट्रवादी।”

-त्रिलोकी सिंह (प्रजा समाजवादी नेता)

“भारतीय शिक्षा किस प्रकार पं0 मालवीय के प्रति ऋणी है, इससे योरोप परिचित है। किन्तु मैंने ऐसा विशाल विद्याकेन्द्र (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) अन्यत्र कहीं नहीं देखा, जो सिर्फ एक व्यक्ति की कृति हो।”

-कर्नल बेजवुड, ब्रिटिश सांसद

“मेरी दृष्टि में अपने समय के समस्त राजनीतिज्ञों में वे सबसे अधिक ज्ञानशील थे। उनके भाषण सरकारी अन्यायों की धृष्टताओं और संगठित ढ़ोगो पर हमला करने वाले होते थे।

-एन0के0 मुखर्जी (इतिहासविद्)

“पं0 मालवीय जी सनातनधर्म के प्राण थे। उन्होंने रुढ़िवादी लोगों के विरोध की रत्तीभर भी परवाह नहीं की और हिन्दू विश्वविद्यालय में स्त्रियों को वेद पढ़ने की खुली व्यवस्था कर दी। वर्तमान युग के ऋषि मालवीय जी की सम्मति का अनुसरण करना ही समाज-सेवकों का कर्त्तव्य है।”

-आचार्य श्रीराम शर्मा

“ये ऋषिकल्प ब्राह्मण इस युग में हिन्दू संस्कृति के एक प्रतिनिधि सत्व थे। स्वामी दयानन्द सरस्वती के बाद हिन्दू समाज में सांस्कृतिक रेखायें निर्मित करने वाले यही एक मात्र पुरुष थे। इनके पवित्र जीवन के चौरासी वर्ष का पल-पल हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान का मूक संगीत गाये बीता।”

-आचार्य चतुरसेन शास्त्री

“शिक्षा, राजनीति और हिन्दू धर्म तथा संस्कारों के सुधार कार्य में उनकी कोई समानता नहीं कर सकता। इस क्षेत्र में वे एक असाधारण व्यक्तित्व थे।”

-डॉ0 श्यामा प्रसाद मुखजा

“कई व्यक्तियों का राजनैतिक क्षेत्र में स्थान रहता है, तथा कइयों का सामाजिक अथवा धार्मिक क्षेत्र में। महामना मालवीय जी भारत की एक ऐसी विभूति थे, जिनको जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उच्च स्मरणीय स्थान प्राप्त था। उनका विशाल हृदय धनी व निर्धन, विद्वान तथा सामान्य व्यक्ति, हिन्दू तथा अहिन्दू सभी को समानता से स्वीकार करता था। उनके नेतृत्व में भारतीय जनता का कल्याण ही हुआ है।”

-बाबू जगजीवन राम

“आज शिक्षित हरिजन समुदाय में काफी संख्या उन लोगें की है, जिन्हें मालवीय जी की उदारता के कारण ही सारी सहूलियतें प्राप्त हुईं। उस दयासागर के हृदय में हरिजनों के प्रति अपार करुणा भरी थी।”

-चौधरी गिरधारी लाल (हरिजन नेता, पूर्व मंत्री)

“मालवीय जी महाराज इस युग के महर्षि थे। उनके बिना भारतीय संस्कृति आज अनाथ दिख रही है।”

-आचार्य शिवपूजन सहाय    

“मालवीय जी की सेवाओं का लेखा-जोखा, देश के विकास का लेखा-जोखा है।”

-सर तेजबहादुर सप्रू (विधिवेत्ता)

-श्रीमती सरोजिनी नायडू

“पण्डित मालवीय जी हृदय से एक हिन्दू, एक राष्ट्रवादी और एक महान मानवतावादी थे।”

“मुझे कुछ लोगों ने उन्हें मुस्लिम-विरोधी बताया था, किन्तु उस महान् देशभक्त के संदर्भ में यह कितना असत्य था! पं0 मालवीय जी सिर्फ भारतीय हैं। उनके व्यंितव का सबसे बड़ा गुण जिसने मुझे सर्वाधिक प्रभावित किया, वह है उनकी मानवीयता, निःस्वार्थ सेवा और उच्च नैतिक मूल्यवत्ता।”

-सर मिर्जा इस्माइल, मैसूर के दीवान