आचार्य नरेन्द्र देव- (1889-1956)

गांधी युग के शीर्षस्थ राष्ट्रीय विभूतियों में से एक हैं। विद्या एवं संस्कृति के क्षेत्र को उनका योगदान महत्त्वपूर्ण है। ये संस्कृत, पाली तथा प्राकृत के विद्वान होने के साथ ही अंग्रेजी फ्रेंच, जर्मन एवं फारसी के गंभीर ज्ञाता थे। महात्मा गांधी विद्यापीठ से वे अध्यापक, अध्यक्ष आचार्य तथा संकायाध्यक्ष के रूप में लगातार 35 वर्षों तक संबद्ध रहे, इसके बाद वे लखनऊ विश्वविद्यालय तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति पद को भी सुशोभित किये। वसुवन्धु-कृतं अधिधर्मकोश’ के पुसे-कृत फ्रेंच अनुवाद को हिन्दी में भाषान्तरित कर बौद्ध दर्शन को नया आयाम दिया। बौद्ध धर्म, मिलिन्द पंह्,ों महाकच्चान कृत” नेत्ति प्रकरण” बुद्धघोष चरित विमुद्धिमग्गो जैसे विटकवाह्य ग्रंथों को आधार बनाया, विज्ञप्ति मात्रता सिद्धि ग्रंथ का भी अनुवाद किया। समृद्ध आचार्य नरेन्द्र देव के वाग्मिता ने यह सिद्ध किया कि हिन्दी भी विचार की भाषा है। उन्होंने हिन्दी भाषा में उच्च कोटि के दार्शनिक विचार प्रस्तुत किया है।

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